Tuesday, September 16, 2014

तरुणोदय सन्देश मास अगस्त-सितम्बर 2014

तरुणोदय सन्देश 

मास अगस्त-सितम्बर 2014                                                                                     अंक 4


नमस्कार,अगस्त-सितम्बर मास का संयुक्तांक आपके सामने प्रस्तुत है | पाठकों से निवेदन है कि 'तरुणोदय सन्देश' को और अच्छा बनाने  सम्बन्धी कोई सुझाव है अथवा कार्यक्षेत्र में कोई गतिविधि जो इसमें प्रकाशन के योग्य है  तो tarunoday2014@gmail.com इस ईमेल पर प्रेषित करे | 

11 सितम्बर विश्व बंधुत्व दिवस 


 प्राध्यापक संघ परिचय वर्ग (18 मई 2014 )

    

प्राध्यापक वर्ग समाज और राष्ट्र की मुख्य धरोहर है | यह  वर्ग संघ के विचारों को जानें और समाज निर्माण में अपनी भूमिका को  सुनिश्चित करेंइसी आलोक में प्रांत में पांच विभागों पर 18 मई 2014 को  प्राध्यापक संघ परिचय वर्ग का आयोजन किया गया |

 अम्बाला,कुरुक्षेत्र ,रोहतक ,फरीदाबाद  व भिवानी विभागों में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल 241 संख्या रही | भिवानी विभाग में ये कार्यक्रम जिला स्तर पर किया गया | इन कार्यक्रमों में 11 वीं 12 वीं व ऊपर की कक्षाओं में पढ़ाने वाले प्राध्यापकों ने भाग लिया | 


कार्यक्रमों में  संघ का  परिचय, संघ  पद्वति, संघ के विभिन्न आयाम और समाज निर्माण में प्राध्यापक कैसे अपनी भूमिका निभा सकते है आदि विषयों पर चर्चा हुई | इन परिचय वर्गों में मा. अरुण जी (अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख ), मा. सीताराम जी व्यास (क्षेत्रीय कार्यवाह ), श्री देवप्रसाद जी भारद्वाज (प्रांत कार्यवाह ) आदि वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ |

भ्रमण कार्यक्रम

          भिवानी विभाग के कॉलेज विद्यार्थी प्रमुखों का भ्रमण कार्यक्रम गत 15-18 अगस्त को चित्तोड़ में हुआ | कुल उपस्थिति 40 रही |
भिवानी विभाग के कॉलेज विद्यार्थी प्रमुखों का भ्रमण कार्यक्रम - हल्दी घाटी

नूतन छात्र अभिनंदन

अगस्त मास के अंतिम सप्ताह में प्रान्त में कुछ स्थानों पर नूतन छात्र अभिनंदन के कार्यक्रम हुए | जिसमें गणपति इंस्टिट्यूट बिलासपुर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, YMCA विश्वविद्यालय एवं गुरुग्राम के कुछ कार्यक्रम प्रमुख रूप से रहे |
कुरुक्षेत्र विवि में नूतन छात्र अभिनंदन

अखण्ड भारत संकल्प दिवस 


गत 14-15 अगस्त को प्रान्त भर में अखण्ड भारत संकल्प दिवस के कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुए | 

जींद
फतेहाबाद

बहादुरगढ़
राजीव गाँधी महाविद्यालय, उचाना जिला जींद

महम


संकलित वृत्त

पंचकुला 6 कार्यक्रम 137 संख्या
अम्बाला 4 कार्यक्रम 175संख्या  
यमुनानगर 7 कार्यक्रम 123 संख्या
जगाधरी 1 कार्यक्रम 39 संख्या
कुरुक्षेत्र 2 कार्यक्रम 112 संख्या 70 अन्य 
कैथल 4 कार्यक्रम 191 संख्या
करनाल 3 कार्यक्रम 152 संख्या
पानीपत 2 कार्यक्रम 190 संख्या
सोनीपत 3 कार्यक्रम 217 संख्या
जींद 2 कार्यक्रम 165 संख्या 50 अन्य
रोहतक 6 कार्यक्रम 230 संख्या 120 अन्य
झज्जर 2 कार्यक्रम 137 संख्या 68 अन्य
फरीदाबाद 6 कार्यक्रम 469 संख्या 106 अन्य
पलवल 5 कार्यक्रम 157 संख्या 50 अन्य
नुह 2 कार्यक्रम 28 संख्या 43 अन्य
गुरुग्राम 2 कार्यक्रम 64 संख्या
रेवाड़ी 1कार्यक्रम 37 संख्या
महेन्द्रगढ़ 2 कार्यक्रम 61 संख्या
भिवानी 1 कार्यक्रम 72 संख्या
हिसार 2 कार्यक्रम 155 संख्या
फतेहाबाद 2 कार्यक्रम 82 संख्या 31 अन्य
सिरसा 8 कार्यक्रम 535 संख्या 125 अन्य
कुल- 73 कार्यक्रम, 3528 संख्या, 663 अन्य*, 
                               कुल संख्या 4191

विशेष 
  • दो कार्यक्रम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय व हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भी हुए।
  • दो स्थानों जींद व फतेहाबाद में कार्यक्रम के अंत में प्रभात फेरी के रूप में तिरंगा यात्रा भी निकाली गई। जिसमें जींद का कार्यक्रम निवासी शिविर के रूप में था।
  • अन्य* में संस्थान परिसर में छात्राएं व नगर/खण्ड में स्वयंसेवकों/नागरिकों/स्कूल विद्यार्थियों  की संख्या सम्मिलित है।


तरुणोदय सम्बन्धी पूर्ण सुचना


27 मार्च  2015 दोपहर 12.00 बजे से 29 मार्च 2015 अपराह्न 2.00 तक
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, दिल्ली रोड़, रोहतक
12वीं, कॉलेज विद्यार्थी(ITI, DIPLOMA भी) एवं युवा प्राध्यापक
चार व्यायाम, सूर्यनमस्कार, गीत-संगठन गढ़े चलो(कंठस्थ) - इनका अभ्यास हो 
शुल्क 200 रुपये, वेष खाकी नेकर सफेद कमीज
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विश्व हिंदु परिषद् - स्वर्ण जयंती वर्ष-2014




सितम्बर/इतिहास-स्मृति

पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपम बलिदान

प्रतिवर्ष पांच जून को हम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते हैंलेकिन यहदिन हमारे मन में सच्ची प्रेरणा नहीं जगा पाता। क्योंकि इसके साथ इतिहास की कोई प्रेरक घटना के नहीं जुड़ी। इस दिन कुछ जुलूसधरने,प्रदर्शनभाषण तो होते हैंपर उससे सामान्य लोगों के मन पर कोई असर नहीं होता। दूसरी ओर भारत
के इतिहास में पाँच सितम्बर, 1730 को एक ऐसी घटना घटी हैजिसकी विश्व में कोई तुलना नहीं की जा सकती।

राजस्थान तथा भारत के अनेक अन्य क्षेत्रों में बिश्नोई समुदाय के लोग रहते हैं। उनके गुरु जम्भेश्वर जी ने अपने अनुयायियों को हरे पेड़ न काटनेपशु-पक्षियों को न मारने तथा जल गन्दा न करने जैसे 29 नियम दिये थे। इन 20 + 9 नियमों के कारण उनके शिष्य बिश्नोई कहलाते हैं। 

पर्यावरण प्रेमी होने के कारण इनके गाँवों में पशु-पक्षी निर्भयता से विचरण करते हैं। 1730 में इन पर्यावरण-प्रेमियों के सम्मुख परीक्षा की वह महत्वपूर्ण घड़ी आयी थीजिसमें उत्तीर्ण होकर इन्होंने विश्व-इतिहास में स्वयं को अमर कर लिया।

1730 में जोधपुर नरेश अजय सिंह को अपने महल में निर्माण कार्य के लिए चूना और उसे पकाने के लिए ईंधन की आवश्यकता पड़ी। उनके आदेश पर सैनिकों के साथ सैकड़ों लकड़हारे निकटवर्ती गाँव खेजड़ली में शमी वृक्षों को काटने चल दिये। 

जैसे ही यह समाचार उस क्षेत्र में रहने वाले बिश्नोइयों को मिलावे इसका विरोध करने लगेे। जब सैनिक नहीं मानेतो एक साहसी महिला ‘इमरती देवी’ के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामवासीजिनमें बच्चे और बड़ेस्त्री और पुरुष सब शामिल थेपेड़ों से लिपट गये। उन्होंने सैनिकों को बता दिया कि उनकी देह के कटने के बाद ही कोई हरा पेड़ कट पायेगा।

सैनिकों पर भला इन बातों का क्या असर होना था ? वे  राजज्ञा से बँधे थेतो ग्रामवासी धर्माज्ञा से। अतः वृक्षों के साथ ही ग्रामवासियों के अंग भी कटकर धरती पर गिरने लगे। सबसे पहले वीरांगना ‘इमरती देवी’ पर ही कुल्हाड़ियों के निर्मम प्रहार हुए और वह वृक्ष-रक्षा के लिए प्राण देने वाली विश्व की पहली महिला बन गयी। 

इस बलिदान से उत्साहित ग्रामवासी पूरी ताकत से पेड़ों से चिपक गये।20वीं शती में गढ़वाल (उत्तराखंड) में गौरा देवीचण्डीप्रसाद भट्ट तथा सुन्दरलाल बहुगुणा ने वृक्षों के संरक्षण के लिए ‘चिपको आन्दोलनचलायाउसकी प्रेरणास्रोत इमरती देवी ही थीं।

भाद्रपद शुक्ल 10 (5 सितम्बर, 1730) को प्रारम्भ हुआ यह बलिदान-पर्व27 दिन तक चलता रहा। इस दौरान 363 लोगों ने बलिदान दिया। इनमें इमरती देवी की तीनों पुत्रियों सहित 69 महिलाएँ भी थीं। अन्ततः राजा ने स्वयं आकर क्षमा माँगी और हरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। ग्रामवासियों को उससे कोई बैर तो था नहींउन्होंने राजा को क्षमा कर दिया।

उस ऐतिहासिक घटना की याद में आज भी वहाँ ‘भाद्रपद शुक्ल 10’ को बड़ा मेला लगता है। राजस्थान शासन ने वनवन्य जीव तथा पर्यावरण-रक्षा हेतु ‘अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार’ तथा केन्द्र शासन ने ‘अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार’ देना प्रारम्भ किया है। यह बलिदान विश्व इतिहास की अनुपम घटना है। इसलिए यही तिथि (भाद्रपद शुक्ल 10 या पाँच सितम्बर) वास्तविक ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ होने योग्य है।