भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व
भारतीय काल गणना
सतयुग - 17,28,000 वर्ष
त्रेतायुग - 12,96,000 वर्ष
द्वापरयुग - 8,64,000 वर्ष
कलियुग - 4,32,000 वर्ष (5114 वर्ष अभी समाप्त होकर 5115 वां वर्ष प्रारम्भ होगा )
कुल योग - 43,20,000 वर्ष (1 चतुर्युगी = 1 मन्वन्तर) सृष्टि का 7 वां मन्वन्तर चल रहा है।
इसको "वैवस्वत" मन्वन्तर कहते है । 14 मन्वन्तर+संध्यांश के 15 युग = 1 कल्प =4 अरब 32 करोड़ वर्ष ।
एक कल्प ब्रह्मा का एक दिन, जितना बड़ा दिन उतनी ही बड़ी रात | एक ब्रह्मा की आयु 100 वर्ष = विष्णु का एक निमेष | विष्णु के 100 वर्ष = रूद्र का एक दिन | रूद्र स्वयं काल रूप है और अनंत है |
"चैत्र, शुक्ल, प्रतिपदा" से कलियुग का 5115 वां वर्ष = विक्रमी संवत 2071 प्रारम्भ ।
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| संघ संस्थापक प.पू.डा. केशव बलिराम हेडगेवार |
- यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है।
- विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न अपराधी हो, और न ही कोई भिखारी हो। साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा 2071 वर्ष पूर्व विक्रमी संवत का शुभारम्भ।
- राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के लिये चुना।
- गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव : सिख परंपरा के द्वितीय गुरू का जन्म दिवस।
- समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में चुना।
- संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।
- शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
- युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन : 5115 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
- समस्त पृथ्वी पर सभी देशों के लोग, अपना नया वर्ष इसी को ही मानते थे। लेकिन 692 वर्ष पहले यूरोपीय समुदाय ने इसकी वैज्ञानिकता के चलते इसे वित्तीय वर्ष के रूप में ही स्वीकार करके इसी दिन "चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (लगभग 1 अप्रैल) से लेकर चैत्र कृष्ण आमावस्या (लगभग 31 मार्च) तक मनाने लगे और उन्होंने अधिनायक वाद तथा संघर्ष के चलते अपने एक नये वर्ष 1 जनवरी को मान्यता दे दी।
- यूरोप के लोगों ने आज से 692 वर्ष पहले ही 1 अप्रैल से 31 मार्च (आधुनिक वित्तीय वर्ष) को भी अंग्रेज़ी तिथियों के हिसाब से निश्चित कर दिया, लेकिन आधार वही भारतीय है।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक प.पू. डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस |
जहां प्रथम मानव ने खोले, निंदियारे लोचन अपने |
जिस दिन देश काल के दो दो, विस्तृत विमल वितान तने |
जिस दिन नभ में तेरे जागे, जिस दिन सूरज चाँद बने |
तब से यह देश हमारा, यह अभिमान हमारा है |
भारत वर्ष हमारा है, यह हिंदुस्थान हमारा है ||




