अखंड भारत संकल्प दिवस कार्यक्रम
गत १४-१५ अगस्त को हरियाणा प्रान्त में अखंड भारत संकल्प
दिवस के कार्यक्रम सम्पन हुए जिसमे कॉलेज विद्याथियों व युवाओं ने उत्साह के साथ
भागीदारी की |हरियाणा प्रान्त के प्रान्त कार्यवाह श्री देवप्रसाद जी भारद्वाज जी
ने फरीदाबाद के एक कार्यक्रम को संबोधित
करते हुए कहा कि १९४७ में हुआ देश का विभाजन २४वां विभाजन था, गत १२५ वर्षों में
लगभग ६०% भारत भूमि हमने खोई है, ऐसा क्यों हुआ इसका चिंतन प्रत्येक देशभक्त युवा
को करना चाहिए | अपने समाज में व्याप्त कमजोरियों के कारण से हम गुलाम हुए , फिर
विभाजित हुए | देश की युवा शक्ति संघटित होकर देश को फिर से एक कर सकती है | सह
प्रान्त कार्यवाह श्री प्रताप जी ने कहा कि सांस्कृतिक भारत कि सीमायें अनंत थी,
विश्व के प्रत्येक भाग में आज भी हिंदू संस्कृति के चिन्ह दिखाई देते हैं | अपने
सर्वे भवन्तु सुखिनः के विचार तथा उसी के अनुरूप व्यवहार से भारत विश्व गुरु था |
आज उसी विचार से हम फिर से अपने भारत को अखंड कर सकते हैं | अखंड भारत केवल मात्र
सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है, और इससे भी बढ़कर संकल्प है |
कैथल के कार्यक्रम में सह प्रान्त प्रचारक श्री विजय जी ने कहा कि भारत
विभाजन विश्व कि एक बढ़ी दुखांत त्रासदी थी, यह आस्थाओं, आकांक्षाओं का सबसे बड़ा
विश्वासघात था |कुछ नेताओं ने अपनी सत्तालालसा के कारण ४० करोड़ लोगों के भविष्य को
खतरे में डाल दिया | अगर हम संघर्ष करते, तो भी इतना कत्लेआम नहीं होता | करनाल के
कार्यक्रम में प्रांत कॉलेज विद्यार्थी प्रमुख श्री राजेश जी ने कहा कि धूर्त
अंग्रेजो की फूट डालो व राज करो कि नीति; संकीर्ण, हिंदू विरोध पर खड़ी मुस्लिम
लीग; मुस्लिम तुष्टिकरण में लिप्त, सत्ता पिपासु कांग्रेस नेतृत्व तथा असंगठित
हिंदू समाज इन चार तत्वों ने मिलकर भारत माता के टुकड़े- टुकड़े कर दिए | विश्व के
ऐतिहासिक अनुभव है कि किसी भी देश का विभाजन स्थाई नहीं होता, जर्मनी का एकीकरण ,
वियतनाम का एकीकरण इसका उदहारण है | किसी भी देश कि संगठित, जागृत व संकल्पित युवा
शक्ति दुनिया का इतिहास और भूगोल दोनों बदल सकती है |

